बोकारो में जंगली हाथियों का कहर, दो दिनों में पांच की जान ली

Anand Kumar
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हाथी के हमले में घायल बच्चा।

महुआटांड़ गंगपुर में दहशत, दादा-पोते को कुचल कर मारा, चार घायल

Bokaro : रामगढ़ और बोकारो जिला के सीमावर्ती क्षेत्र महुआटांड़ गंगपुर में जंगली हाथियों के हमले ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। शुक्रवार को हाथियों के झुंड ने गांव में घुसकर एक घर पर हमला कर दिया, जिसमें 55 वर्षीय समर साव और उनके तीन वर्षीय पोते अमन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। एक दिन पहले ही गंगपुर से सटे छोटकी पन्नू गांव में हाथियों के झुंड ने तीन लोगों की जान ले ली थी।

इस दर्दनाक घटना के बाद गंगपुर गांव में अफरातफरी मच गई। परिजन और ग्रामीण चीख-पुकार करते रहे, लेकिन हाथियों के आतंक के कारण कोई भी घटनास्थल के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

सूचना मिलते ही प्रशासन और वन विभाग की टीम हरकत में आई, लेकिन तब तक गांव में भय और तनाव का माहौल गहराता जा चुका था।


पांच हाथियों का झुंड, घर को बनाया निशाना

ग्रामीणों के अनुसार, पांच सदस्यीय हाथियों का झुंड अचानक गंगपुर गांव में घुस आया। झुंड ने एक घर को निशाना बनाया, उसी दौरान समर साव और उनका पोता अमन कुमार हाथियों की चपेट में आ गए। दोनों को बेरहमी से कुचल दिया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना इतनी अचानक हुई कि परिवार और आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हाथी गांव की गलियों में उत्पात मचाते रहे। हाथियों के गांव से निकलने के बाद ग्रामीणों ने साहस जुटाकर दोनों के शव बाहर निकाले।


चार लोग घायल, एक की हालत गंभीर

हाथियों के इस हमले में चार अन्य लोग भी घायल हुए हैं। घायलों में 11 वर्षीय राशि कुमारी, 6 वर्षीय आयुष कुमार, 9 वर्षीय राहुल कुमार और 50 वर्षीय शांति देवी शामिल हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, राहुल कुमार की हालत गंभीर बनी हुई है, क्योंकि हाथियों ने उसका पैर बुरी तरह कुचल दिया। सभी घायलों को आनन-फानन में रामगढ़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।


दो दिन में दूसरी बड़ी घटना, ग्रामीणों में गुस्सा

ग्रामीणों का कहना है कि एक दिन पहले ही पड़ोस के पन्नू गांव में हाथियों के झुंड ने तीन लोगों की जान ले ली थी। लगातार हो रही घटनाओं से गांवों में डर का माहौल है और लोग रात होते ही घरों में सिमटने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शाम पांच बजे के बाद गांव में बिजली काट दी जाती है, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। इसी अंधेरे का फायदा उठाकर हाथियों का झुंड गांवों में घुस आता है। हाथियों के बढ़ते हमलों और लगातार बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।


स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने वन विभाग और प्रशासन से हाथियों की नियमित निगरानी, गांवों के आसपास रोशनी की व्यवस्था और स्थायी सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है। लोगों का साफ कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।

जंगल से गांव तक क्यों आ रहे हैं हाथी

जंगली हाथियों के हमले कोई अचानक होने वाली घटनाएं नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में सामने आए मामलों का विश्लेषण बताता है कि ये घटनाएं एक स्पष्ट पैटर्न के तहत बढ़ी हैं, जिसमें जंगल, बिजली, मौसम और मानवीय गतिविधियां आपस में जुड़ी हुई हैं। रामगढ़ के महुआटांड़ गंगपुर की घटना इसी श्रृंखला की एक कड़ी मानी जा रही है।

विशेषज्ञों और वन विभाग के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, झारखंड में हाथियों का पारंपरिक मूवमेंट वन कॉरिडोर पर आधारित रहा है। लेकिन इन कॉरिडोर क्षेत्रों में

  • खनन गतिविधियों का विस्तार
  • सड़कों और बस्तियों का निर्माण
  • जंगलों में जलस्रोतों का सूखना
  • भोजन की कमी

के कारण हाथी गांवों का रख करते हैं। धान और महुआ के सीजन में हाथियों को इनकी गंध मिल जाती है और वे घरों में रखी फसलों को खाने के लिए घरों को तोड़ डालते हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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