Jamshedpur : फादर सीआर प्रभु के पुरोहिताई जीवन के साठ वर्ष पूरे होने पर उनकी हीरक जयंती संत जोसेफ अस्पताल के चैपल, भिलाई पहाड़ी में श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई गई। इस अवसर पर विशेष मिसा बलिदान अर्पित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न धर्मप्रांतों से वरिष्ठ काथलिक धर्मगुरुओं ने सहभागिता की।
मुख्य याजक के रूप में तेलेस्फोर बिलुंग उपस्थित रहे। समारोह में रांची के सेवानिवृत्त आर्कबिशप फेलिक्स टोप्पो, पटना के सेवानिवृत्त आर्कबिशप विलियम डिसूजा, प्रोविंशियल जेरी कुटिन्हो, अमेरिकन पुरोहित फादर सिरिल फर्नांडिस और विकर जनरल फादर अल्वीन भी शामिल हुए।
मिसा उपरांत साठ वर्षों की सेवा के प्रतीक स्वरूप मोमबत्ती दिवस मनाया गया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए और केक काटकर फादर प्रभु के दीर्घ, स्वस्थ और सेवा-समर्पित जीवन की कामना की गई।
अपने आशीर्वचन में आर्कबिशप फेलिक्स टोप्पो ने कहा कि सीआर प्रभु का हृदय बालक के समान निर्मल और पवित्र है, जबकि उनके कार्यों में परिपक्वता और अनुशासन स्पष्ट झलकता है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार की प्रेरणा से फादर प्रभु ने लोगों के आध्यात्मिक और आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर सेवा की है।
आर्कबिशप विलियम डिसूजा ने कहा कि ईश्वरीय आदेश को स्वीकार करते हुए फादर प्रभु मंगलौर से झारखंड आए और पिछले 52 वर्षों से आदिवासी और वंचित समाज के शैक्षणिक व आर्थिक विकास के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
बिशप तेलेस्फोर बिलुंग ने वर्ष 1964 से अब तक फादर प्रभु के योगदान को अनुकरणीय बताते हुए उनकी सेवाओं की सराहना की।
फादर सिरिल फर्नांडिस ने कहा कि फादर सीआर प्रभु ने यीशु मसीह के सच्चे अनुयायी के रूप में अपना जीवन जिया है—मोमबत्ती की तरह स्वयं जलकर दूसरों के जीवन को प्रकाशमान किया है।
संत जोसेफ अस्पताल के निदेशक फादर डेविड विंसेंट ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन बहन अंजली धान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन लोयोला स्कूल के प्रिंसिपल फादर विनोद फर्नांडीज ने दिया।
समारोह में बड़ी संख्या में पुरोहित, धर्मबहनें, विश्वासी, परिजन और शुभचिंतक उपस्थित रहे। सभी ने फादर प्रभु को बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि फादर सीआर प्रभु जमशेदपुर धर्मप्रांत के पहले हिंदुस्तानी पुरोहित रहे हैं। वे रेक्टर, विकर जनरल, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और प्रिंसिपल जैसे दायित्व निभा चुके हैं। वर्तमान में वे संत जोसेफ अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ लेते हुए पुस्तक लेखन में संलग्न हैं।
फादर प्रभु अपनी सभी उपलब्धियों और सामाजिक-आध्यात्मिक योगदान का श्रेय माता-पिता और परमेश्वर को देते हैं। उन्होंने झारखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए लोगों को गैर-सरकारी संगठनों के गठन के लिए प्रेरित किया और लंबे समय तक मार्गदर्शन भी दिया।