झारखंड मंत्रालय में अबुआ दिशोम बजट संगोष्ठी का आयोजन, बेहतर सुझाव देनेवाले तीन प्रतिभागी पुरस्कृत
Ranchi : आगामी बजट को लेकर झारखंड सरकार की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा हैं। इसी क्रम में 29 जनवरी को झारखंड मंत्रालय में अबुआ दिशोम बजट संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में आयोजित इस बजट-पूर्व संगोष्ठी में अर्थव्यवस्था, विकास और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया गया।
संगोष्ठी में बेहतर और व्यावहारिक सुझाव देने वाले तीन प्रतिभागियों स्वाति बंका, किशोर प्रसाद वर्मा और गोपी हांसदा को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में दिल्ली और बेंगलुरु से आए अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने आगामी बजट को लेकर अपने विचार साझा किए।
बजट संतुलित, समावेशी और विकासोन्मुख होना चाहिए: सीएम
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य 25 वर्षों का सफर तय कर चुका है और अब समय है कि राज्य के लिए मजबूत, बहुआयामी और दूरदर्शी बजट तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि बजट ऐसा हो, जो इस युवा राज्य की संभावनाओं को आकार दे सके, जन आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे और विकास को नई गति दे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी बजट का आकार करीब एक लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसमें और वृद्धि होगी। ऐसे में राजस्व संग्रह बढ़ाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में संसाधनों की कमी न हो।
लोगों की भागीदारी से बनेगा बेहतर बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर बजट के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों की भी भागीदारी जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार लगातार जनता से सुझाव ले रही है। उन्होंने कहा कि लोगों की सहभागिता से ही संतुलित और विकास आधारित बजट तैयार किया जा सकता है।
विदेश दौरों से मिले अनुभव देंगे नई दिशा
मुख्यमंत्री ने हालिया दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक और लंदन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दौरों के दौरान विभिन्न देशों की नीतियों, आर्थिक संरचना, कार्य संस्कृति और सामाजिक जीवन को नजदीक से समझने का अवसर मिला। इन अनुभवों के आधार पर राज्य को नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पारंपरिक ढर्रे से हटकर नए रास्ते तलाश रही है। ऐसे में उनकी जरूरतों और अपेक्षाओं के अनुरूप बजट तैयार करना आवश्यक है, ताकि युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
संसाधनों से भरपूर है झारखंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में संसाधनों और क्षमताओं की कोई कमी नहीं है। जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ प्रचुर खनिज संपदा, मानव संसाधन, मेहनतकश श्रमिक, किसान और खिलाड़ी राज्य की ताकत हैं। जरूरत है इन संसाधनों का बेहतर उपयोग और वैल्यू एडिशन करने की।
उन्होंने कहा कि राज्य प्राकृतिक, औद्योगिक और आर्थिक संसाधनों से समृद्ध है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, खेल और आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। कृषि में नए प्रयोग हो रहे हैं, खेतों तक पानी पहुंच रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड भले ही क्षेत्रफल में छोटा और ऐतिहासिक रूप से पिछड़ा राज्य रहा हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था में इसका योगदान अहम है। उन्होंने कहा कि नई नीति, कार्ययोजना और बेहतर प्रबंधन के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
जनजातीय परंपराओं और स्थानीय संसाधनों पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है और यहां की जनजातीय परंपराएं बेहद समृद्ध हैं। सरकार इन परंपराओं को संरक्षित और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लाह और तसर जैसे उत्पादों में झारखंड देश में अग्रणी है और इन संसाधनों का स्थानीय स्तर पर बेहतर उपयोग कर राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।