झारखंड : उद्योगपति का अपहृत बेटा हजारीबाग से सकुशल बरामद

Anand Kumar
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Jamshedpur : झारखंड में 13 जनवरी को अपहृत जमशेदपुर के उद्योगपति देवांग गांधी का बेटा कैरव गांधी मंगलवार तड़के हजारीबाग जिले के बरही से सकुशल मिला। पुलिस ने यह जानकारी दी।पुलिस के अनुसार, उद्योगपति देवांग गांधी के बेटे कैरव (24) का अपहरण उस समय किया गया था, जब वह सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अपने कार्यालय जा रहा था।

शहर के पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष ने बताया, ‘‘जमशेदपुर पुलिस ने आज उसे खोज लिया। उसे तड़के करीब साढ़े चार बजे उसके घर भेजा गया।’’उन्होंने कहा कि इससे पहले पुलिस को घटना की रात राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर कांदरबेड़ा इलाके से कैरव की कार मिली थी। इस तरह, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक की सुरक्षित बरामदगी संभव हो सकी और परिजनों ने राहत की सांस ली।

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विदेशी नंबर से आई थी फिरौती की कॉल

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अपहरणकर्ताओं ने कैरव के पिता देवांग गांधी को व्हाट्सएप पर कॉल कर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। यह कॉल एक विदेशी नंबर से की गई थी, जिसका कोड इंडोनेशिया का (+62) था। बाद में फिरोती की रकम बढ़ाकर 10 करोड़ कर दी गयी। इस विदेशी नंबर ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।अपहरणकर्ताओं ने धमकी दी थी कि यदि पुलिस को सूचना दी गई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

7 टीमों ने दिन-रात एक कर दी जांच

इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए जमशेदपुर पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी थी। एसएसपी और डीजीपी के निर्देश पर सात विशेष जांच दलों का गठन किया गया। पुलिस की जांच का दायरा झारखंड से निकलकर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैल गया।जांच के दौरान हनी ट्रैप का एंगल भी सामने आया, जिसने मामले को और जटिल बना दिया।

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राजनीतिक दबाव और जनआक्रोश बढ़ा

कैरव की बरामदगी में देरी होने पर शहर में आक्रोश बढ़ता जा रहा था। भाजपा नेताओं और विधायक सरयू राय ने पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव बनाया।भाजपा ने चेतावनी दी थी कि यदि जल्द कैरव को रिहा नहीं कराया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा और मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाया जाएगा। व्यापारी संगठनों ने भी शहर बंद की चेतावनी दी थी।

दबिश बढ़ी तो अपहरणकर्ताओं ने टेके घुटने

माना जा रहा है कि पुलिस की लगातार बढ़ती दबिश और बिहार-झारखंड के विभिन्न ठिकानों पर हो रही छापेमारी से घबराकर अपहरणकर्ता घुटने टेकने को मजबूर हो गए।हालांकि, पुलिस ने अब तक यह खुलासा नहीं किया है कि गिरफ्तारी कहां से हुई और क्या फिरौती दी गई थी या नहीं। पुलिस इस पूरे मामले पर जल्द ही एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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