केवल खनिज निर्यातक राज्य नहीं बनना चाहता झारखंड : दावोस में हेमंत सोरेन ने रखा सतत और समावेशी विकास का रोडमैप

Anand Kumar
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सीआईआई के साथ बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

Davos/Ranchi : विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में झारखंड ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सतत, समावेशी और जन-केंद्रित विकास का स्पष्ट विज़न वैश्विक मंच पर रखा। मुख्यमंत्री ने दो अलग-अलग उच्चस्तरीय संवादों में यह संदेश दिया कि झारखंड अब केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का निर्यातक राज्य बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि संसाधनों के मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

CII राउंडटेबल में झारखंड का विज़न

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने World Economic Forum के दौरान Confederation of Indian Industry (CII) द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक “Delivering Sustainability at Scale: Pathways for Global Transformation” में भाग लिया।
इस अवसर पर वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और संस्थागत निवेशकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों के केवल दोहन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका जिम्मेदार, सतत और मूल्य-वर्धित उपयोग सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि झारखंड के संसाधनों से यहां के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिले। सतत औद्योगिकीकरण, डाउनस्ट्रीम उद्योगों का विकास और स्थानीय रोजगार सृजन हमारी प्राथमिकता है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सततता का अर्थ केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक समावेशन से भी जुड़ा है, खासकर स्थानीय और आदिवासी समुदायों के लिए।

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रोजगार, हरित ऊर्जा और औद्योगिक संतुलन

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार खनिज आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रही है। उनका जोर इस बात पर रहा कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, ताकि विकास टिकाऊ और न्यायसंगत हो।

पर्यटन को बनाया जाएगा विकास का मजबूत स्तंभ

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने झारखंड की विशाल और अब तक काफी हद तक अप्रयुक्त पर्यटन संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य इको-टूरिज्म, प्रकृति आधारित पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को सतत विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित करना चाहता है।
इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे, बल्कि प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने वैश्विक निवेशकों को जिम्मेदार खनन, सतत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन अवसंरचना के क्षेत्र में झारखंड के साथ सहयोग के लिए आमंत्रित किया।

WEF के दूसरे दिन भी झारखंड की मजबूत उपस्थिति

WEF की बैठक के दूसरे दिन भी झारखंड ने ऊर्जा उत्पादन, उपभोग, सतत विकास और क्षेत्रीय नेतृत्व से जुड़े वैश्विक संवादों में सक्रिय भागीदारी की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माताओं, निवेशकों और वैश्विक संगठनों के साथ कई महत्वपूर्ण चर्चाओं में हिस्सा लिया।

इंटर-मिनिस्टीरियल डायलॉग में राज्यों की भूमिका पर जोर

मुख्यमंत्री का इंटर-मिनिस्टीरियल डायलॉग में संबोधन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस सत्र में स्लोवाकिया के पूर्व वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री वाजिल हुडाक सहित कई वैश्विक नेता शामिल हुए।
चर्चा का मुख्य विषय सतत और समावेशी आर्थिक विकास के लिए वैश्विक सहयोग ढांचे को सुदृढ़ करना था। संवाद में नवीकरणीय ऊर्जा, भारी वाहन निर्माण में निवेश की संभावनाएं और बागवानी क्षेत्र में टिकाऊ पद्धतियों जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

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ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार पर फोकस

मुख्यमंत्री ने “Capital in Action: Scaling Energy Systems through Policy, Finance and Regional Leadership” विषयक चर्चा में भी भाग लिया। इस दौरान स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार, नवाचार आधारित वित्तपोषण और प्रभावी नीतिगत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

जलवायु लक्ष्यों को जमीन पर उतारने में राज्यों की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तय किए गए जलवायु और स्थिरता लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने में राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने झारखंड द्वारा औद्योगिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय आर्थिक मजबूती को सुदृढ़ करने के प्रयासों को रेखांकित किया।

कुल मिलाकर, WEF 2026 में झारखंड की यह भागीदारी इस बात का संकेत है कि राज्य आर्थिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक समावेशन के साथ जोड़ते हुए एक नए विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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