फिरौती की डेडलाइन बीती, कैरव गांधी अब भी ट्रेसलेस, CID ने संभाली कमान, चैंबर की बैठक, परिजनों से मिले सुदेश

Anand Kumar
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Jamshedpur : उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस को कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। हाई-प्रोफाइल मामला होने के कारण झारखंड पुलिस की आपराधिक अनुसंधान विभाग (CID) ने अब जांच की समीक्षा और निगरानी अपने हाथ में ले ली है।

डीजीपी के निर्देश पर गठित CID टीम ने स्थानीय पुलिस और SIT से अब तक की प्रगति रिपोर्ट ली है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को तेज करने का निर्देश दिया है। CID का स्पष्ट लक्ष्य है- अपहरण में शामिल अपराधियों तक जल्द से जल्द पहुंचना और कैरव गांधी की सुरक्षित बरामदगी।


13 जनवरी को हुआ था अपहरण, NH-33 पर मिली थी कार

24 वर्षीय कैरव गांधी का अपहरण 13 जनवरी को उस वक्त हुआ था, जब वे घर से अपनी कंपनी जा रहे थे। बाद में उनकी कार NH-33 पर कांदरबेड़ा के पास लावारिस हालत में मिली थी। इसके बाद से पूरे शहर में हड़कंप मच गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अपहरण के बाद आरोपी जिन संभावित रास्तों से गुजरे, वहां के टोल प्लाजा और प्रमुख चौराहों के CCTV फुटेज खंगाले गए हैं। फुटेज में दो संदिग्ध वाहन एक साथ टोल पार करते दिखे हैं, लेकिन अभी तक कोई निर्णायक लिंक सामने नहीं आया है। इसके बावजूद पुलिस इन वाहनों की मूवमेंट, टाइमिंग और संभावित रूट को दोबारा खंगाल रही है।


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फिरौती की डेडलाइन बीती, अपहरणकर्ता खामोश

जांच में यह भी सामने आया है कि अपहरणकर्ताओं ने इंडोनेशियाई नंबर से संपर्क कर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी और 48 घंटे की डेडलाइन दी थी।
हालांकि डेडलाइन बीतने के बाद न तो फिरौती को लेकर कोई नया कॉल आया और न ही कोई संकेत, जिससे पुलिस की चिंता और बढ़ गई है। परिवार और पुलिस दोनों ही इस स्तर पर चुप्पी साधे हुए हैं।


कई राज्यों में दबिश, सात टीमें जांच में जुटीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है, जिसमें जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां जिले की टीमें शामिल हैं। कुल 7 अलग-अलग टीमें

  • बिहार (हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, लालगंज)
  • पश्चिम बंगाल
  • झारखंड के धनबाद, हजारीबाग, कोडरमा

जैसे इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही हैं।


इन गैंगों पर पुलिस का फोकस

पुलिस की जांच फिलहाल कुछ कुख्यात आपराधिक गिरोहों के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिनमें—

  • चंदन सोनार गैंग
  • प्रिंस खान गैंग (दुबई से ऑपरेट होने की आशंका)
  • छोटू यादव गैंग
  • हाजीपुर–लालगंज गैंग

शामिल हैं। पुलिस इन गिरोहों के लोकल सहयोगियों और नेटवर्क को खंगाल रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी आशंका जताई गई है कि अपहरण में फर्जी पुलिस स्टीकर लगी स्कॉर्पियो या SUV का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।


व्यवसायियों में आक्रोश, चैंबर की आपात बैठक

कैरव गांधी के अपहरण से जमशेदपुर के व्यवसायिक समुदाय में भारी रोष और डर का माहौल है। कोल्हान के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीस ने अन्य संगठनों के साथ आपात बैठक बुलाई।

चैंबर अध्यक्ष मानव केडिया ने कहा कि—

“पूरा चैंबर परिवार पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। हम लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं। डर के माहौल में व्यवसाय करना मुश्किल हो रहा है।”

चैंबर ने राज्य के पुलिस कप्तान को पत्र लिखा है और जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात का निर्णय लिया है।


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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

  • रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने परिवार से मुलाकात कर पुलिस को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
  • भाजपा ने प्रदर्शन कर सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया।
  • जमशेदपुर ईस्ट की विधायक पूर्णिमा साहू ने सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
  • JDU विधायक सरयू राय ने DGP और SSP से बात कर SIT को और मजबूत करने की मांग की।
  • पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी।

सुदेश महतो ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—

“जब राज्य में व्यवसायी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे, तब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे का क्या अर्थ है?”


शहर में भय, जवाब की प्रतीक्षा

पांच दिन बीत जाने के बाद भी कैरव गांधी का कोई सुराग नहीं मिलना न सिर्फ पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि जमशेदपुर की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
अब सबकी निगाहें CID की अगली रणनीति और किसी बड़े ब्रेकथ्रू पर टिकी हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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