पुलिस की भूमिका पर सवाल : PHED घोटाले के आरोपी को क्यों दी जा रही है सुरक्षा?
Ranchi : पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बहुचर्चित घोटाले के आरोपी कैशियर संतोष कुमार की एफआईआर के आधार पर रांची पुलिस का ईडी कार्यालय तक पहुंच जाना, फिर प्रवर्तन निदेशालय को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ना और अंततः हाईकोर्ट का यह आदेश देना कि ईडी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस प्रकरण ने पिछले दिनों खूब चर्चा बटोरी।
अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक अहम तथ्य सामने आया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ईडी ने संतोष कुमार को 12 जनवरी को न तो पूछताछ के लिए बुलाया था और न ही कोई समन जारी किया गया था। इसके बावजूद वह खुद बिना बुलावे के ईडी के रांची कार्यालय पहुंचा था।
यही तथ्य अब पूरे मामले की दिशा और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
आरोपी को पुलिस सुरक्षा, उठ रहे हैं गंभीर सवाल
यही नहीं, इस पूरे प्रकरण के बाद रांची पुलिस द्वारा संतोष कुमार को सुरक्षा मुहैया कराना भी सवालों के घेरे में है। जिस व्यक्ति को कुछ समय पहले घोटाले के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, उसी के घर पर अब पांच सशस्त्र सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। यह सुरक्षा व्यवस्था कई दिनों से जारी है, जिसे लेकर पुलिस की प्राथमिकताओं और भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
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बिना समन ईडी कार्यालय पहुंचा था आरोपी
सूत्रों के मुताबिक, 12 जनवरी को संतोष कुमार स्वयं ईडी कार्यालय पहुंचा और अपने ही विभाग के कुछ अभियंताओं के खिलाफ जानकारी देने की बात कहने लगा। जबकि उस दिन ईडी की ओर से उसे न तो तलब किया गया था और न ही पूछताछ का कोई कार्यक्रम तय था। बताया जा रहा है कि संतोष कुमार जिन अधिकारियों के खिलाफ जानकारी देने पहुंचा था, उनमें कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि और तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह के नाम शामिल थे। उल्लेखनीय है कि जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद संतोष कुमार नवंबर 2025 में इन्हीं अभियंताओं के खिलाफ पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव को लिखित शिकायत साक्ष्यों के साथ दे चुका था।
पूछताछ में बाकी नामों पर सवाल, यहीं से बिगड़ा मामला
ईडी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जब संतोष कुमार जेल में था, तब ईडी की पूछताछ के दौरान उसने कई अन्य अधिकारियों और व्यक्तियों के नाम भी बताए थे। लेकिन 12 जनवरी को जब वह बिना समन ईडी कार्यालय पहुंचा, तो वह केवल कुछ चुनिंदा अभियंताओं के नामों तक ही सीमित रहा।
जब जांच अधिकारी ने उससे पूछा कि पहले बताए गए अन्य नामों के बारे में अब वह जानकारी क्यों नहीं दे रहा है, तो इसी सवाल पर वह अचानक आक्रोशित हो गया। आरोप है कि इसी दौरान उसने शीशे के जग से खुद को सिर पर चोट पहुंचा ली।
इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और ईडी अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
एफआईआर के बाद ईडी दफ्तर पहुंची पुलिस, हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
एफआईआर दर्ज होते ही रांची पुलिस का ईडी कार्यालय पहुंचना और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करना, केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय को झारखंड हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि रांची पुलिस ईडी अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मामला केवल एक आपराधिक शिकायत नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा संवेदनशील विवाद है।
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मूल रोकड़ बही नष्ट करने और जालसाजी के आरोप
संतोष कुमार ने विभागीय सचिव को दी गई लिखित शिकायत में कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर और तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि पर मूल रोकड़ बही नष्ट कर जाली रोकड़ बही तैयार कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
उसका दावा है कि—
- अप्रैल 2023 से अगस्त 2023
- मई 2023 से सितंबर 2023
के बीच मूल रोकड़ बही को नष्ट कर नई जाली रोकड़ बही तैयार की गई। संतोष कुमार का कहना है कि मूल रोकड़ बही अब भी उसके पास सुरक्षित है और लंबे समय से विभागीय अभियंताओं द्वारा सरकारी दस्तावेजों में नियमविरुद्ध छेड़छाड़ की जाती रही है।
अवैध इकरारनामा और धमकी का आरोप
तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह पर भी संतोष कुमार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उसके अनुसार, एजेंसी मेसर्स प्रवीण कुमार जैन के साथ अवैध इकरारनामा किया गया।
आरोप है कि—
- 5.25 लाख रुपये की बैंक गारंटी 4 जनवरी 2019 को बनाई गई
- लेकिन नियमों को दरकिनार करते हुए 2 जनवरी 2019 को ही इकरारनामा कर लिया गया
संतोष कुमार का दावा है कि उसे निलंबन और बर्खास्तगी की धमकी देकर इस इकरारनामा पर हस्ताक्षर करवाए गए।
2.71 करोड़ से खुला 23 करोड़ का घोटाला
गौरतलब है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के खाते से 2 करोड़ 71 लाख 62 हजार 833 रुपये की फर्जी निकासी के मामले में 28 दिसंबर 2023 को रांची के सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
इस मामले में सदर थाना पुलिस ने 9 अप्रैल 2024 को संतोष कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में ईडी ने इस केस में ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
ईडी की जांच में सामने आया कि कुल 23 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी निकासी की गई, जिसमें 22 करोड़ 93 लाख 42 हजार 947 रुपये मेसर्स राकड्रिल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खाते में ट्रांसफर किए गए थे।