
Ranchi : झारखंड शराब घोटाले में आईएएस अधिकारी और उत्पाद विभाग के पूर्व सचिव विनय कुमार चौबे के साथ गिरफ्तार किये गये तत्कालीन संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र कुमार सिंह को दोबारा संयुक्त आयुक्त के पद पर नियुक्त कर दिया गया है। 20 मई 2025 को झारखंड के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने विनय चौबे के साथ गजेंद्र सिंह को भी गिरफ्तार किया था और 21 मई को उनको होटवार जेल भेजा था। इस दौरान सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। 56 दिन जेल में गुजारने के बाद 14 जुुलाई को गजेंद्र सिंह को कोर्ट से जमानत मिली और वे रिहा हुए।
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15 जनवरी को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने संयुक्त आयुक्त से लेकर उत्पाद निरीक्षक स्तर के कुल 33 अधिकारियों का तबादला और पदस्थापन किया है। इनमें गजेंद्र सिंह जो कि जेल से रिहा होने के बाद पदस्थापन की प्रतीक्षा में थे, उन्हें फिर से संयुक्त आयुक्त बना दिया गया है। माना जा रहा है कि गजेंद्र सिंह को विनय चौबे के खिलाफ गवाही देने का इनाम मिला है। एसीबी ने गजेंद्र सिंह पर भी वही आरोप लगाये हैं, जो विनय चौबे पर लगे हैं। लेकिन कोर्ट से दोषी या निर्दोष का फैसला हुए बिना गजेंद्र सिंह को उसी पद पर पदस्थापित किये जाने से कई सवाल उठ रहे हैं।
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गौरतलब है कि गजेंद्र सिंह शराब घोटाला के आरोपियों में से एक है, और उन्होंने कोर्ट में बयान दिया है कि छत्तीसगढ़ के विफल उत्पाद मॉडल को झारखंड में लागू कराने के लिए शीर्ष स्तर पर दबाव बनाया गया, जबकि विभागीय स्तर पर इसके खिलाफ स्पष्ट और लिखित आपत्तियां मौजूद थीं। कोर्ट के समक्ष दिए गए अपने 164 के बयान में गजेंद्र कुमार सिंह ने यह भी कहा है कि जब उन्होंने नीतिगत खामियों को उच्च स्तर पर रखने की कोशिश की, तो उन्हें चेतावनी दी गई और विनय चौबे ने कहा कि “आप जैसा कहा जा रहा है वैसा करिए, नहीं तो इस्तीफा दे दीजिए।”
इस तरह गजेंद्र सिंह ने घोटाले का पूरा दोष विनय चौबे पर मढ़ दिया और इसका फल भी उन्हें तत्काल मिला है। वे एक बार फिर उत्पाद विभाग के सबसे ताकतवर पद पर विराजमान हो गये हैं।
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