रिश्तेदारों के नाम खरीदी गई लग्जरी संपत्तियां, मनी लॉन्ड्रिंग का शक, एंटी करप्शन ब्यूरो कर सकता है कुर्की की कार्रवाई

Ranchi : जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से पड़ताल के बाद पता चला है कि हरियाणा के गुरुग्राम में प्रीमियम इलाकों में करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियां चौबे के करीबी रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं। इन संपत्तियों को बेनामी तरीके से खरीदा गया लगता है, और अब ACB इन्हें जब्त करने की योजना बना रहा है।
जांच में मुख्य भूमिका चौबे के साले शिपिज त्रिवेदी की सामने आई है। उनको कथित तौर पर अवैध कमाई को रियल एस्टेट में लगाने का जरिया बनाया गया। गुरुग्राम के AR Builders में एक लग्जरी फ्लैट, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ रुपये है, शिपिज त्रिवेदी और उनकी पत्नी प्रियंका त्रिवेदी के नाम पर मिला। पेमेंट की व्यवस्था इतनी उलझाई गई थी कि असली पैसों का स्रोत छिपा रहे।
इसी तरह AIPL Autograph प्रोजेक्ट में एक यूनिट, जिसकी कीमत भी लगभग 1 करोड़ के आसपास है, ‘Tribe Trust Company’ के नाम पर बुक हुई। ट्रस्ट का इस्तेमाल दिखावे के लिए था—वास्तव में नियंत्रण चौबे के परिवार के हाथ में ही था। न्यू गुरुग्राम के Spaze Tower में एक महंगी कमर्शियल प्रॉपर्टी भी रडार पर है, जो पहले अलग-अलग नामों पर थी और बाद में शिपिज के नाम ट्रांसफर कर दी गई।
जांच अधिकारियों का मानना है कि गुरुग्राम की चमकदार रियल एस्टेट मार्केट को इन अवैध पैसों को ‘साफ’ करने के लिए चुना गया। परिवार के नाम की आड़ में एक पूरा नेटवर्क बनाया गया, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की साफ झलक मिल रही है। चौबे की पोस्टिंग और प्रभाव का फायदा उठाकर ये संपत्तियां खड़ी की गईं।
अब ACB की टीमें इन प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, पेमेंट ट्रेल और मालिकाना हक की हर डिटेल खंगाल रही हैं। जल्द ही कुर्की की कार्रवाई हो सकती है। यह मामला नौकरशाही में गहरे बैठे भ्रष्टाचार की एक और मिसाल बनता जा रहा है, जहां सरकारी पद का दुरुपयोग कर निजी साम्राज्य खड़े किए जाते हैं। जांच आगे बढ़ने पर और भी खुलासे होने की संभावना है।