वेनेजुएला संकट पर विश्व दो ध्रुवों में बंटा : अमेरिका पर ‘गुंडागर्दी’ का आरोप चीन-उत्तर कोरिया ने मांगी मादुरो की रिहाई, पूरी दुनिया में विरोध प्रदर्शन

Anand Kumar
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 वेनेजुएला

Caracas/Beijing/Pyongyang : वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के इस कदम को कई देश “गुंडागर्दी” और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं। मादुरो को न्यूयॉर्क की एक बदनाम जेल में रखा गया है, जबकि वेनेजुएला ने इसे वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा करार दिया। दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, और अमेरिका ने कहा कि अभी चुनाव की कोई योजना नहीं है।

चीन और उत्तर कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया

चीन ने अमेरिका से मादुरो दंपति की तत्काल रिहाई की मांग की है। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि किसी राष्ट्राध्यक्ष को इस तरह अगवा करना अस्वीकार्य है और मुद्दे का समाधान केवल बातचीत से होना चाहिए। इससे पहले भी चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की थी।उत्तर कोरिया ने इसे और सख्त शब्दों में “गुंडागर्दी” बताया। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और स्वतंत्रता पर गंभीर आघात है, जो वैश्विक शांति को खतरे में डाल सकता है।

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रूस का आरोप: अमेरिका की नजर तेल पर

रूस के सुरक्षा परिषद उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टीम अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, भले दुनिया इसे गलत माने। मेदवेदेव ने इसे अमेरिका की पुरानी नीति का हिस्सा बताया, जहां लैटिन अमेरिका को अपना प्रभाव क्षेत्र मानकर संसाधनों (खासकर तेल) पर कब्जा करने की कोशिश की जाती है।

 वेनेजुएला

वेनेजुएला की चेतावनी: वैश्विक खतरा

वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मादुरो की गिरफ्तारी न केवल वेनेजुएला बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा है। उन्होंने इसे खतरनाक मिसाल बताते हुए कहा कि आज वेनेजुएला, कल कोई और देश हो सकता है। मंत्री ने अमेरिकी विदेश नीति को उपनिवेशवादी करार दिया और कहा कि वेनेजुएला ऐसी सोच को कभी स्वीकार नहीं करेगा।उन्होंने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाने के फैसले का समर्थन किया, जो संविधान के अनुरूप है। साथ ही दावा किया कि अमेरिकी हमले में मादुरो के ज्यादातर सुरक्षाकर्मी मारे गए, हालांकि संख्या नहीं बताई।

 वेनेजुएला

दुनिया भर में विरोध की लहर

अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ वैश्विक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नीदरलैंड्स की राजधानी एम्स्टर्डम में प्रदर्शनकारियों ने “अमेरिकी साम्राज्यवाद की मौत” के नारे लगाए। चेक गणराज्य के प्राग में अमेरिकी दूतावास के बाहर “वेनेजुएला से हाथ हटाओ” के पोस्टर दिखे। पाकिस्तान के कराची और तुर्किये के इस्तांबुल में भी सड़कों पर लोग उतरे, जहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अमेरिका की निंदा कर रहे थे।

अमेरिका का रुख: चुनाव अभी नहीं

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि मादुरो के हटने के बाद वेनेजुएला में चुनाव कराना अभी जल्दबाजी होगी। उनका फोकस काराकास में बची राजनीतिक नेतृत्व से नीतिगत बदलाव करवाना है। रुबियो ने चुनाव चर्चा को “समय से पहले” बताते हुए कहा कि हालात साफ होने तक कोई योजना नहीं है।

हमले की नई जानकारियां: सैटेलाइट तस्वीरें और जेल

२ जनवरी की रात चले अमेरिकी ऑपरेशन की सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वेनेजुएला के सैन्य अड्डों पर भारी क्षति दिख रही है। अमेरिकी सेना के चेयरमैन जनरल डैन केन ने बताया कि ऑपरेशन ढाई घंटे चला, जिसमें वायुसेना, नौसेना और स्पेशल फोर्सेस ने हिस्सा लिया। 150 से ज्यादा विमान और सैनिक शामिल थे, जो मादुरो को भागने का मौका नहीं देना चाहते थे। महीनों से खुफिया निगरानी चल रही थी।मादुरो को न्यूयॉर्क के स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस से मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर (एमडीसी ब्रुकलिन) में शिफ्ट किया गया है। यह जेल अपनी खराब हालत के लिए कुख्यात है। हिंसा, बदसलूकी और अव्यवस्था की शिकायतें आम हैं। यहां 1300 कैदी हैं, और पहले होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को रखा गया था (ट्रंप ने उन्हें माफी दी)। फिलहाल मेक्सिको के ड्रग कार्टेल लीडर भी यहीं हैं। मादुरो पर ड्रग्स और हथियार तस्करी के आरोप में मुकदमा चलेगा।

वैश्विक प्रभाव और आगे की संभावनाएं

यह घटना वैश्विक राजनीति में नई दरार पैदा कर सकती है। अमेरिका की कार्रवाई को तेल संसाधनों पर कब्जे की साजिश बताया जा रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे नार्को-टेररिज्म के खिलाफ कदम बताता है। वेनेजुएला में उपराष्ट्रपति रोड्रिगेज अंतरिम कमान संभाल रही हैं, लेकिन अराजकता का खतरा बना है। आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेंगी।

Caracas/Beijing/Pyongyang : वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के इस कदम को कई देश “गुंडागर्दी” और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं। मादुरो को न्यूयॉर्क की एक बदनाम जेल में रखा गया है, जबकि वेनेजुएला ने इसे वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा करार दिया। दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, और अमेरिका ने कहा कि अभी चुनाव की कोई योजना नहीं है।

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चीन और उत्तर कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया

चीन ने अमेरिका से मादुरो दंपति की तत्काल रिहाई की मांग की है। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि किसी राष्ट्राध्यक्ष को इस तरह अगवा करना अस्वीकार्य है और मुद्दे का समाधान केवल बातचीत से होना चाहिए। इससे पहले भी चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की थी।उत्तर कोरिया ने इसे और सख्त शब्दों में “गुंडागर्दी” बताया। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और स्वतंत्रता पर गंभीर आघात है, जो वैश्विक शांति को खतरे में डाल सकता है।

रूस का आरोप: अमेरिका की नजर तेल पर

रूस के सुरक्षा परिषद उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टीम अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, भले दुनिया इसे गलत माने। मेदवेदेव ने इसे अमेरिका की पुरानी नीति का हिस्सा बताया, जहां लैटिन अमेरिका को अपना प्रभाव क्षेत्र मानकर संसाधनों (खासकर तेल) पर कब्जा करने की कोशिश की जाती है।

वेनेजुएला की चेतावनी: वैश्विक खतरा

वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मादुरो की गिरफ्तारी न केवल वेनेजुएला बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा है। उन्होंने इसे खतरनाक मिसाल बताते हुए कहा कि आज वेनेजुएला, कल कोई और देश हो सकता है। मंत्री ने अमेरिकी विदेश नीति को उपनिवेशवादी करार दिया और कहा कि वेनेजुएला ऐसी सोच को कभी स्वीकार नहीं करेगा।उन्होंने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाने के फैसले का समर्थन किया, जो संविधान के अनुरूप है। साथ ही दावा किया कि अमेरिकी हमले में मादुरो के ज्यादातर सुरक्षाकर्मी मारे गए, हालांकि संख्या नहीं बताई।

दुनिया भर में विरोध की लहर

अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ वैश्विक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नीदरलैंड्स की राजधानी एम्स्टर्डम में प्रदर्शनकारियों ने “अमेरिकी साम्राज्यवाद की मौत” के नारे लगाए। चेक गणराज्य के प्राग में अमेरिकी दूतावास के बाहर “वेनेजुएला से हाथ हटाओ” के पोस्टर दिखे। पाकिस्तान के कराची और तुर्किये के इस्तांबुल में भी सड़कों पर लोग उतरे, जहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अमेरिका की निंदा कर रहे थे।

अमेरिका का रुख: चुनाव अभी नहीं

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि मादुरो के हटने के बाद वेनेजुएला में चुनाव कराना अभी जल्दबाजी होगी। उनका फोकस काराकास में बची राजनीतिक नेतृत्व से नीतिगत बदलाव करवाना है। रुबियो ने चुनाव चर्चा को “समय से पहले” बताते हुए कहा कि हालात साफ होने तक कोई योजना नहीं है।

हमले की नई जानकारियां: सैटेलाइट तस्वीरें और जेल

२ जनवरी की रात चले अमेरिकी ऑपरेशन की सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वेनेजुएला के सैन्य अड्डों पर भारी क्षति दिख रही है। अमेरिकी सेना के चेयरमैन जनरल डैन केन ने बताया कि ऑपरेशन ढाई घंटे चला, जिसमें वायुसेना, नौसेना और स्पेशल फोर्सेस ने हिस्सा लिया। 150 से ज्यादा विमान और सैनिक शामिल थे, जो मादुरो को भागने का मौका नहीं देना चाहते थे। महीनों से खुफिया निगरानी चल रही थी।मादुरो को न्यूयॉर्क के स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस से मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर (एमडीसी ब्रुकलिन) में शिफ्ट किया गया है। यह जेल अपनी खराब हालत के लिए कुख्यात है। हिंसा, बदसलूकी और अव्यवस्था की शिकायतें आम हैं। यहां 1300 कैदी हैं, और पहले होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को रखा गया था (ट्रंप ने उन्हें माफी दी)। फिलहाल मेक्सिको के ड्रग कार्टेल लीडर भी यहीं हैं। मादुरो पर ड्रग्स और हथियार तस्करी के आरोप में मुकदमा चलेगा।

वैश्विक प्रभाव और आगे की संभावनाएं

यह घटना वैश्विक राजनीति में नई दरार पैदा कर सकती है। अमेरिका की कार्रवाई को तेल संसाधनों पर कब्जे की साजिश बताया जा रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे नार्को-टेररिज्म के खिलाफ कदम बताता है। वेनेजुएला में उपराष्ट्रपति रोड्रिगेज अंतरिम कमान संभाल रही हैं, लेकिन अराजकता का खतरा बना है। आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेंगी।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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