रेवेन्यू बोर्ड की आपत्तियों के बावजूद छत्तीसगढ़ मॉडल पर बनायी गयी झारखंड की शराब नीति, खजाने को लगा 448 करोड़ का चूना

Anand Kumar
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Jan-Man ki Baat
Jharkhand liquor policy scam
, Ranchi : झारखंड में शराब कारोबार की नीति बदलाव ने एक बार फिर विवादों को जन्म दे दिया है। जांच एजेंसियों के सामने आने वाले तथ्यों से पता चलता है कि 2022 में लागू की गई नई उत्पाद नीति में छत्तीसगढ़ के उस मॉडल को अपनाया गया, जो पड़ोसी राज्य में बड़े घोटाले का कारण बना। नतीजा – राज्य सरकार को करीब 448 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान। यह खुलासा होलसेल सप्लायर कंपनियों की अनियमितताओं से जुड़ा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर आपूर्ति और बिक्री की गई।

सूत्रों के अनुसार, कोविड के बाद शराब से राजस्व बढ़ाने के नाम पर 2022 की नई नीति बनाई गई। उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ का दौरा किया और वहां की स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (सीएसएमसीएल) की व्यवस्था को समझा। लौटकर आए दल ने रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर सीएसएमसीएल को सलाहकार बना दिया गया। इस कॉर्पोरेशन के तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी, जिन्हें छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में मुख्य आरोपी माना जाता है, झारखंड की नीति तैयार करने में सीधे शामिल हो गए। उनकी फीस करीब एक करोड़ रुपये से ज्यादा तय की गई।

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नीति में बड़ा बदलाव यह था कि शराब की थोक और खुदरा बिक्री दोनों झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के जरिए करने का प्रावधान डाला गया – ठीक छत्तीसगढ़ की तरह। बैठकें हुईं, अनुमान लगाए गए कि इससे राजस्व में 15 फीसदी तक इजाफा होगा। लेकिन हकीकत उलटी निकली। नीति का ड्राफ्ट राजस्व पर्षद को भेजा गया तो वहां से कड़ी आपत्तियां आईं।

राजस्व पर्षद के तत्कालीन सदस्य अमरेंद्र प्रताप सिंह ने पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए चेताया। उन्होंने बताया कि 2009-12 तक जब थोक और खुदरा दोनों निजी हाथों में थे, तो राजस्व में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2012-17 में थोक जेएसबीसीएल के पास और खुदरा निजी था, तो औसत वृद्धि कम रही। 2017-19 में दोनों जेएसबीसीएल को दिए गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। फिर 2019-20 में खुदरा बिक्री निजी को लौटाई गई तो राजस्व दोगुना हो गया।

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पर्षद ने सवाल उठाया – जो मॉडल पहले नुकसान दे चुका है, उसे दोबारा अपनाने से राजस्व कैसे बढ़ेगा? लेकिन ये आपत्तियां दरकिनार कर दी गईं और नीति लागू हो गई। जांच में अब सामने आ रहा है कि सप्लायर कंपनियों ने समय पर आपूर्ति नहीं की, कम मात्रा भेजी और अन्य गड़बड़ियां कीं, जिससे बाजार प्रभावित हुआ और खजाने को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

एसीबी और अन्य एजेंसियां इस मामले की तह तक जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में चल रही जांच से भी झारखंड के तार जुड़े बताए जा रहे हैं। फिलहाल, यह सवाल बरकरार है कि पुरानी गलतियों को जानबूझकर दोहराने का फायदा किसे हुआ? जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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