पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने की औपचारिक पहल शुरू हो गई है। सोमवार को जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा विधानसभा पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा से जुड़ा पत्र सौंपा। पार्टी की ओर से 10 पन्नों के दस्तावेजी सबूत और वीडियो भी दिए गए हैं। हालांकि, अनंत सिंह की विधायकी पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष को लेना है।
- उमेश कुशवाहा बोले- अनंत सिंह पर होगा क्विक एक्शन
- अब स्पीकर के फैसले पर टिकी निगाहें
- नीलम देवी को 25 नवंबर तक सरकारी बंगला खाली करने का आदेश
- ललन सिंह और संजय झा ने अनंत सिंह पर सवाल टाला
- अनंत सिंह का पलटवार- जेडीयू 12 सीटों पर सिमट जाएगी
- पप्पू यादव ने बताया इस्तेमाल करो और फेंक दो की राजनीति
- अनंत सिंह के समर्थन में भी उठीं आवाजें
- बाढ़ की जेडीयू इकाई भी भंग
- क्या अनंत सिंह की राजनीति पर लगेगा विराम?
उमेश कुशवाहा बोले- अनंत सिंह पर होगा क्विक एक्शन
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा सोमवार को पार्टी नेता और विधान परिषद में व्हिप संजय गांधी के साथ विधानसभा पहुंचे। दोनों नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की मांग से जुड़ा पत्र सौंपा।
उमेश कुशवाहा ने कहा कि पार्टी ने 24 अक्टूबर को ही विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनंत सिंह की पार्टी विरोधी गतिविधियों की जानकारी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अनंत सिंह जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार कर रहे थे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयान दे रहे थे।
कुशवाहा के मुताबिक, अनंत सिंह के खिलाफ उपलब्ध दस्तावेज और वीडियो विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में जमा करा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वह यह जानने पहुंचे थे कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। विधानसभा अध्यक्ष के मौजूद नहीं रहने पर उन्होंने उनके सचिव से मुलाकात की।
अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई पर उन्होंने कहा, “क्विक एक्शन होगा, इंतजार कीजिए।”

अब स्पीकर के फैसले पर टिकी निगाहें
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने इससे पहले कहा था कि औपचारिक आवेदन मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब जेडीयू की ओर से पत्र और दस्तावेज सौंपे जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम का इंतजार है।
पार्टी ने अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए अभी उनकी विधायकी समाप्त होना तय नहीं माना जा सकता। अंतिम निर्णय संबंधित नियमों और प्रक्रिया के तहत ही होगा।
नीलम देवी को 25 नवंबर तक सरकारी बंगला खाली करने का आदेश
अनंत सिंह और उनके परिवार की मुश्किलें सिर्फ विधानसभा की सदस्यता तक सीमित नहीं हैं। उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को पटना स्थित सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया गया है।
भवन निर्माण विभाग ने नीलम देवी को पटना के 1 मॉल रोड स्थित सरकारी आवास संख्या-01 को 25 नवंबर 2026 तक खाली करने को कहा है।
नीलम देवी को राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की सदस्य के रूप में उपमंत्री का दर्जा प्राप्त था। इसी आधार पर 19 मई 2026 को उन्हें सरकारी आवास आवंटित किया गया था। लेकिन 26 अक्टूबर को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने समिति की सदस्य के रूप में उनका मनोनयन तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया।
इसके बाद भवन निर्माण विभाग ने आवास खाली करने का नोटिस जारी किया। पत्र में आवास आवंटन (पटना केंद्रीय पूल) नियमावली, 1986 का हवाला देते हुए कहा गया है कि पद समाप्त होने के बाद सरकारी आवास में रहने की अनुमन्य अवधि एक महीने की है। इसी आधार पर 25 नवंबर तक आवास खाली करने का निर्देश दिया गया है।
ललन सिंह और संजय झा ने अनंत सिंह पर सवाल टाला
अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी भी चर्चा में है। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा एक साथ नजर आए।
पत्रकारों ने ललन सिंह से पूछा कि अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी की कार्रवाई में क्या उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने का कदम भी शामिल है।
इस पर ललन सिंह ने सीधे जवाब देने के बजाय कहा, “संजय झा जी से बात करिए।” इसके बाद वह अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए। गाड़ी में बैठने से पहले उन्होंने संजय झा की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “मतलब ठीक कहे न।”
दोनों नेताओं की प्रतिक्रिया के बाद अनंत सिंह की सदस्यता के मुद्दे पर जेडीयू नेतृत्व के रुख को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
अनंत सिंह का पलटवार- जेडीयू 12 सीटों पर सिमट जाएगी
पार्टी से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने जेडीयू नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी आगामी चुनाव में इसका परिणाम भुगतेगी और 12 सीटों पर सिमट जाएगी।
अनंत सिंह ने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। उन्होंने नीतीश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि जिस नेता ने पार्टी बनाई, वह अब पार्टी नहीं चला पा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में फैसले नीतीश कुमार की इच्छा के अनुसार नहीं हो रहे हैं।
आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर अनंत सिंह ने अपनी पार्टी बनाने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि जब सरकार पर संकट आया था, तब उन्होंने उसे बचाने में भूमिका निभाई थी।
पप्पू यादव ने बताया इस्तेमाल करो और फेंक दो की राजनीति
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने अनंत सिंह को जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने पर भाजपा और आरएसएस की राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्तेमाल करने के बाद नेताओं को किनारे कर दिया जाता है।
पप्पू यादव ने आनंद मोहन, दिनेश जी, अजय मंडल और गिरधारी यादव का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि उनके साथ क्या हुआ। उन्होंने इस पूरे विवाद के लिए ललन सिंह और संजय झा को जिम्मेदार ठहराया।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी विधायक या सांसद के अनुशासन तोड़ने पर पार्टी को कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन अनुशासन का पालन सभी नेताओं के लिए समान रूप से होना चाहिए।
अनंत सिंह के समर्थन में भी उठीं आवाजें
जेडीयू के पूर्व विधान परिषद सदस्य वाल्मीकि सिंह ने अनंत सिंह के निष्कासन पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में नीतीश कुमार और निशांत कुमार के समर्थकों को धीरे-धीरे किनारे किया जा रहा है। उनके मुताबिक, अनंत सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई उचित नहीं थी।
वहीं, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि पार्टी के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई करने का अधिकार पार्टी नेतृत्व के पास है। उन्होंने इस मामले को राजनीतिक विवाद बनाने से बचने की बात कही।
बाढ़ की जेडीयू इकाई भी भंग
अनंत सिंह पर कार्रवाई के साथ जेडीयू ने संगठनात्मक जिला बाढ़ की पूरी इकाई को भी भंग कर दिया है। बाढ़ के जिलाध्यक्ष मयंक राज को भी पद से हटा दिया गया है। उन्हें केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का करीबी माना जाता है।
इसके अलावा अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया है। उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने का आदेश भी जारी किया गया है।
क्या अनंत सिंह की राजनीति पर लगेगा विराम?
जेडीयू ने अनंत सिंह के खिलाफ एक के बाद एक कदम उठाए हैं। पहले पार्टी से छह साल का निष्कासन, फिर विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने की अनुशंसा और अब उनकी पत्नी का उपमंत्री का दर्जा समाप्त होने के बाद सरकारी आवास खाली करने का आदेश।
इन घटनाक्रमों ने बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विधानसभा अध्यक्ष अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे? क्या अनंत सिंह अपनी अलग पार्टी बनाकर जेडीयू को चुनौती देंगे? और क्या इस विवाद का असर आने वाले चुनावों में भी दिखाई देगा?
फिलहाल, सबसे अहम फैसला विधानसभा अध्यक्ष के हाथ में है। जेडीयू ने अपनी ओर से दस्तावेज सौंप दिए हैं, लेकिन अनंत सिंह की विधायकी पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।
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