गोमिया में हाथियों ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों को कुचलकर मारा, गांव में दहशत

Anand Kumar
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प्रतीकात्मक फोटो (इनसेट में विलाप करती महिला)

Bokaro : बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत छुटकी पुन्नू गांव में हाथियों के झुंड ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों को कुचलकर मार डाला। हाथियों के हमले में पांच अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बुधवार शाम करीब सात बजे हाथियों का झुंड अचानक गांव में घुस आया था। उस वक्त ग्रामीणों ने मशाल जलाकर, शोर मचाकर और अन्य उपायों से हाथियों को किसी तरह जंगल की ओर खदेड़ दिया। ग्रामीणों को लगा कि खतरा टल गया है, लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हुई।

तड़के लौटे हाथी, घरों में घुसकर किया हमला

गुरुवार तड़के करीब तीन बजे हाथियों का वही झुंड दोबारा गांव में दाखिल हुआ। इस बार हाथियों ने पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक रूप अपनाया। कई घरों के गेट और दीवारें तोड़ दी गईं और हाथी घरों के अंदर तक घुस गए। सो रहे ग्रामीणों पर अचानक हुए हमले से गांव में अफरा-तफरी मच गई।

हमले के दौरान जान बचाने के लिए घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे बुजुर्ग हाथियों के झुंड में घिर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथियों ने तीन लोगों को पटक-पटक कर कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

मृतक एक ही परिवार के सदस्य

मृतकों की पहचान गंगा करमाली, कमली देवी और गणेश करमाली की पत्नी भगिया देवी के रूप में की गई है। तीनों एक ही करमाली परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। एक ही परिवार से तीन लोगों की एक साथ मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है।

इस हमले में पांच अन्य ग्रामीण भी घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में रोष

गोमिया प्रखंड में हाथियों के हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 25 जनवरी को दरहाबेड़ा गांव में हाथियों के कुचलने से करमचंद सोरेन की मौत हो गई थी। उस मामले में वन विभाग को निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद हाथियों का आतंक थमता नजर नहीं आ रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि हाल के दिनों में आसपास के जिलों में भी हाथियों के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। लगातार हो रही मौतों से लोग दहशत में हैं और वन विभाग पर समय रहते ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रभावित इलाके में हाथियों की सतत निगरानी, रैपिड रिस्पॉन्स टीम की तैनाती और सुरक्षित अलर्ट सिस्टम लागू करने की मांग की है।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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