28 जनवरी को जारी निषेधाज्ञा आदेश में लिखा – 3 फरवरी से होगा नामांकन
Ranchi : राज्य निर्वाचन आयोग ने झारखंड में नगर निकाय चुनावों की घोषणा कर दी है। चुनावों की तारीखों की घोषणा के बाद 28 जनवरी को ही सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने प्रेस कांफ्रेंस करके अपने-अपने क्षेत्र में चुनाव कार्यक्रम और तैयारियों की जानकारी दे दी।
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 29 जनवरी से राज्य के सभी 48 नगर निकायों में नामांकन शुरू हो गया। 4 फरवरी तक नामांकन किये जा सकेंगे. 5 फरवरी को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी होगी और 6 फरवरी तक नाम वापस लिये जा सकेंगे. 7 फरवरी को चुनाव चिन्ह का आवंटन होगा। 23 फरवरी को मतदान होगा और 27 फरवरी को मतगणना की जाएगी।
इतनी जानकारी तो लगभग हर उस व्यक्ति के पास है, जो थोड़ा बहुत सामान्य ज्ञान रखता है, अखबार या वेबसाइट पढ़ता है या टीवी -मोबाइल देखता है। सरकारी अधिकारियों से तो अपेक्षा की जाती है कि वे इन महत्वपूर्ण तारीखों को याद रखेंगे और सरकारी पत्राचारों में या आदेश-निर्देश जारी करने में कम से कम सही दिन-तारीख लिखेंगे। लेकिन झारखंड के दो अधिकारियों ने तो कॉपी पेस्ट के चक्कर में ऐसी गलती कर दी जो चर्चा का विषय बन गयी है।
ये दोनों अधिकारी किसी साधारण सेवा के नहीं हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस की अधिकारी है। इनकी योग्यता और मेधा पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है, लेकिन 28 जनवरी को इन दोनों अधिकारियों ने एक ही जैसे फॉर्मेट पर अपने-अपने क्षेत्र में नगर निकाय चुनाव को लेकर जो निषेधाज्ञा आदेश निकाला उसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यही अधिकारी जो 14 घंटे, 16 घंटे की पढ़ाई यूपीएससी सिविस सर्विसेज की परीक्षा पास करने के लिए करते थे, अब क्या किसी सरकारी आदेश में लिखी इबारत को पढ़ने की जहमत भी उठाते हैं या नहीं।
मामला पोड़ाहाट अनुमंडल और चास अनुमंडल के अनुमडंल पदाधिकारियों से जुड़ा है। पोड़ाहाट अनुमंडल में चक्रधरपुर नगर परिषद का चुनाव होना है और चास अनुमंडल में चास नगर निगम का। पोड़ाहाट की अनुमंडल पदाधिकारी हैं श्रुति राजलक्ष्मी और चास की एसडीओ हैं प्रांजल ढांडा।
इन दोनों अनुमंडल पदाधिकारियों ने निषेधाज्ञा की धारा 163 जो पहले धारा 144 हुआ करती थी, लगाने का जो पत्र जारी किया है, उसमें एक भारी गलती है। चास एसडीएम प्रांजल ढांडा ने अपने आदेश में लिखा है कि निगम क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता प्रभावी है। अनुमंडल न्यायालय, चास द्वारा चास नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत निषेधाज्ञा लागू की गयी है। नगरपालिका (आम) निर्वाचन, 2026 के क्रम में दिनांक 03.02.2026 से नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। और इसके बाद प्रांजल ढांडा, भाप्रसे, अनुमंडल दंडाधिकारी, चास (बोकारो) बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लगाने का आदेश जारी करती है और आदेश में आगे क्या करना है, क्या नहीं करना है ये सब लिखा है।

ठीक ऐसा ही आदेश, लगभग शब्दशः पोड़ाहाट की एसडीएम भी जारी करती हैं और लिखती हैं कि 01.2026 के द्वारा संपूर्ण चक्रधरपुर नगर परिषद् क्षेत्रांतर्गत निषेधाज्ञा लागू की गयी है। नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 के क्रम में दिनांक 03.02.2026 से नामांकन की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाएगी। अतः उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में मैं श्रुति राजलक्ष्मी, (भा.प्र.से.) अनुमंडल दंडाधिकारी, पोड़ाहाट, चक्रधरपुर, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चक्रधरपुर अनुमंडल कार्यालय के 100 मीटर की परिधि में निम्नांकित निषेधाज्ञा आदेश जारी करती हूं।

अब बताइये कि एक नहीं बल्कि -दो-दो एसडीएम के आदेश में ये गलती कैसे हो सकती है कि नामांकन के लिए आप निषेधाज्ञा आदेश 28 जनवरी को जारी करती हैं और लिखती हैं कि 3 फरवरी से नामांकन होगा., जबकि नामांकन का काम 29 जनवरी से शुरू होकर 4 फरवरी तक चलेगा।
अगर दोनों एसडीएम मैडमों ने आदेश का प्रारूप पढ़ा होता, तो उन्हें सहज ध्यान में आ जाता कि जब नामांकन 3 फरवरी से होना है तो 28 जनवरी को निषेधाज्ञा का आदेश क्यों निकाला जा रहा है। लेकिन यहां पढ़ने की फुर्सत किसे है। साहब और मैडम को तो बस साइन करना है। निषेधाज्ञा आदेश का कॉमन फॉर्मेट कहीं से बनकर आया होगा। जो अफसर अनुभवी हैं या सरकारी कार्यों में इंटरेस्ट लेते हैं, वे आदेशों को पढ़ते हैं, जरूरत पड़ने पर अपने अनुसार बदलवाते या सुधरवाते हैं, लेकिन लगता है कि पोड़ाहाट और चास की एसडीएम को अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर ज्यादा भरोसा है और इसलिए उन्होंने बिना पढ़े आदेश पर दस्तखत कर दिये।
आदेश जारी हो गया और अब यह चर्चा का विषय बन गया है। हो सकता है कि यह गलती पकड़ ली गयी हो। और नया आदेश भी जारी कर दिया गया हो, लेकिन ये दो आदेश बताते हैं कि चाहे कितना भी पढ़ाकू, कितना भी जहीन और कितना भी बुद्धिमान कैडिंडेट कितनी भी कठिन परीक्षा पास करके अफसर क्यों न बन जाये, सरकारी सिस्टम का मालिक कंप्यूटर ऑपरेटर ही रहेगा। वो जो टाइप करके दे देगा, उसी पर दस्तखत हो जायेगा।