Chaibasa : नक्सलियों को डीजीपी की आखिरी चेतावनी – सरेंडर करें या मुठभेड़ के लिए रहें तैयार

Anand Kumar
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ऑपरेशन मेगाबुरू में शामिल टीम के साथ डीजीपी।

अब तक की सबसे बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाई के बाद चाईबासा पहुंचीं तदाशा मिश्रा, जवानों का बढ़ाया मनोबल

Chaibasa : झारखंड पुलिस को नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिलने के बाद राज्य की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा शनिवार को चाईबासा पहुंचीं। उन्होंने हालिया संयुक्त अभियान में शामिल जवानों और अधिकारियों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया और स्पष्ट शब्दों में नक्सलियों को चेतावनी दी कि अब उनके पास दो ही रास्ते बचे हैं—या तो आत्मसमर्पण करें या फिर मुठभेड़ के लिए तैयार रहें।

डीजीपी ने कहा कि कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में चला यह अभियान नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक साबित हुआ है और माओवादी संगठन को ऐसा झटका लगा है जिससे उबर पाना अब लगभग असंभव है।


डीजीपी

नक्सलियों को अब तक का सबसे बड़ा झटका

चाईबासा में मीडिया और अधिकारियों से बातचीत में डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि हाल के संयुक्त ऑपरेशन से नक्सली नेटवर्क की “कमर पूरी तरह टूट चुकी है।” उन्होंने कहा कि वर्षों से कोल्हान और सारंडा के जंगलों में सक्रिय माओवादी संगठन को अब निर्णायक क्षति पहुंची है और बचे-खुचे नक्सलियों के लिए मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।


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पुख्ता खुफिया सूचना पर हुआ ऑपरेशन

डीजीपी ने बताया कि 22 और 23 जनवरी को चाईबासा एसपी अमित रेणु को गुप्त सूचना मिली थी कि भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता अनल उर्फ पतिराम मांझी और अनमोल उर्फ सुशांत अपने सशस्त्र दस्ते के साथ छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमड़ीह और बहदा गांव के जंगली-पहाड़ी इलाके में डेरा डाले हुए हैं।

इसी इनपुट के आधार पर झारखंड पुलिस, कोबरा 209 बटालियन, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर विशेष अभियान शुरू किया।


डीजीपी

कई दौर की भीषण गोलीबारी, 17 नक्सली ढेर

अभियान के दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई चरणों में भीषण मुठभेड़ हुई। नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग की, लेकिन सुरक्षा बलों ने रणनीति और संयम के साथ जवाब दिया। नक्सली जंगल की ओर भागे, जिसके बाद सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

सर्च ऑपरेशन के दौरान कुल 17 नक्सलियों के शव बरामद किए गए, जिनमें संगठन के कई बड़े और कुख्यात नेता शामिल हैं। यह कार्रवाई झारखंड में अब तक की सबसे बड़ी नक्सल विरोधी सफलताओं में गिनी जा रही है।


करोड़ों के इनामी नक्सली मारे गए

मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम अनल उर्फ पतिराम मांझी का है, जिस पर झारखंड में 1 करोड़ रुपये, ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये और एनआईए द्वारा 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

वहीं अनमोल उर्फ सुशांत पर झारखंड में 25 लाख और ओडिशा में 65 लाख रुपये का इनाम था।
इसके अलावा अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालू, समीर सोरेन, रापा उर्फ पावेल, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सुरजमुनी, जोंगा, सोमबारी पूर्ति, सोमा होनहागा, मुक्ति होनहागा और सरिता भी मारे गए हैं।

इन सभी पर झारखंड और ओडिशा में हत्या, लूट, विस्फोट और उगाही जैसे कई संगीन मामले दर्ज थे।


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हथियारों का जखीरा बरामद

सारंडा क्षेत्र में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सली ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। बरामदगी में

  • 4 AK-47 राइफल
  • 1 AKM
  • 4 INSAS
  • 3 SLR
  • 3 .303 राइफल
  • बड़ी संख्या में कारतूस और दैनिक उपयोग का सामान

शामिल है। इससे नक्सलियों की सैन्य क्षमता को बड़ा झटका लगा है।


डीजीपी

तीन साल में 183 नक्सली गिरफ्तार

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि चाईबासा और आसपास के इलाकों में पिछले तीन वर्षों से नक्सल विरोधी अभियान लगातार तेज किए गए हैं। इस दौरान अब तक 183 नक्सलियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि इससे पहले की मुठभेड़ों में 11 नक्सली मारे गए थे। मौजूदा अभियान से संगठन को अपूरणीय क्षति पहुंची है।


सुरक्षा कैंपों से लौटा ग्रामीणों का भरोसा

डीजीपी ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित होने से नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगी है और स्थानीय ग्रामीणों का पुलिस व प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें, अन्यथा अभियान और तेज किया जाएगा।


17 शवों का पोस्टमार्टम शुरू

इधर मारे गए नक्सलियों के शवों का कड़ी सुरक्षा के बीच पोस्टमार्टम शुरू कर दिया गया है। चाईबासा एसपी अमित रेणु ने बताया कि शवों की संख्या अधिक होने के कारण प्रक्रिया में समय लग रहा है। परिजनों के संपर्क में आने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव सौंपे जाएंगे। जिन शवों का कोई दावेदार नहीं होगा, उनके लिए कुछ दिन तक इंतजार किया जाएगा।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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