मासूमों की वापसी, टूटती जंजीरें : अंश-अंशिका की तलाश से बेनकाब हुआ बच्चों की तस्करी का काला साम्राज्य

Anand Kumar
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मानवता के खिलाफ अपराध : गुलगुलिया गैंग का भंडाफोड़, 16 गिरफ्तार, 12 मासूम आजाद

Ranchi : अंश और अंशिका… दो मासूम नाम, जिनकी तलाश ने आखिरकार बच्चों की तस्करी के एक खौफनाक नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। रांची पुलिस ने मानवता के खिलाफ वर्षों से चल रहे एक संगठित अपराध पर करारा प्रहार करते हुए 16 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया है और 12 मासूम बच्चों को उनके चंगुल से आज़ाद कराया है।

यह केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि उन बच्चों की घर वापसी की कहानी है, जिन्हें जबरन बचपन से छीन लिया गया था।


अंश और अंशिका बने उम्मीद की शुरुआत

धुर्वा इलाके से अंश और अंशिका के लापता होने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। परिजनों की बेचैनी, मां-बाप की आंखों में डर और अनिश्चितता—इन्हीं सवालों के बीच रांची पुलिस ने एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को अहसास हुआ कि यह कोई सामान्य गुमशुदगी नहीं, बल्कि एक संगठित बच्चा तस्करी गिरोह का काम है। यहीं से उस गिरोह तक पहुंचने का रास्ता खुला, जिसे पुलिस ‘गुलगुलिया गैंग’ के नाम से पहचान रही है।


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दस साल से चल रहा था मासूमियत का सौदा

एसएसपी राकेश रंजन के अनुसार, गुलगुलिया गैंग पिछले 10 वर्षों से बच्चों की चोरी और तस्करी में सक्रिय था। गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निशाना बनाता, फिर उन्हें बिहार, बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश तक बेच दिया जाता।

इन बच्चों से—

  • जबरन भीख मंगवाई जाती,
  • पॉकेटमारी और चोरी कराई जाती,
  • और बच्चियों को देह व्यापार जैसे अमानवीय धंधों में धकेला जाता था।

पुलिस को आशंका है कि गिरोह के तार मानव अंगों की तस्करी से भी जुड़े हो सकते हैं। इस एंगल पर जांच जारी है।


चार जिलों से बरामद हुए बच्चे, पहचान की जंग अभी बाकी

बरामद 12 बच्चों को रांची, बोकारो, धनबाद और चाईबासा से चोरी किया गया था। फिलहाल सभी बच्चों को धुर्वा थाना में सुरक्षित रखा गया है।
कई लोग इन बच्चों को अपना बताते सामने आ रहे हैं, लेकिन सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस ने डीएनए जांच कराने का फैसला लिया है।

एसएसपी ने बताया कि गिरोह की यह चालाकी थी कि छोटे बच्चों का आधार बनने से पहले ही उन्हें अपने नाम पर रख लिया जाता, जिससे वे कानूनी तौर पर उनके “बच्चे” बन जाते—और फिर उन्हें दोबारा बेच दिया जाता।


गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने इस मामले में जिन 16 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं—

विरोधी खेरवार उर्फ अनुराग (रामगढ़),
अंथोनी खेरवार (रामगढ़),
प्रमोद कुमार (सिल्ली),
आशिक गोप (सिल्ली),
राज रवानी (लातेहार),
नव खेरवार (पुरुलिया),
सोनी कुमारी (रामगढ़),
चांदनी देवी (रामगढ़),
सीता देवी (लातेहार),
दीनू भुइयां (लातेहार),
संन्यासी खेरवार (रामगढ़),
मालिन देवी (रामगढ़),
बेबी देवी (सिल्ली),
सोनिया देवी,
उपैइया खेरवार (लातेहार)।


अभी खत्म नहीं हुई लड़ाई

पुलिस का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। गिरोह से जुड़े कई अन्य लोग अभी फरार हैं। रांची पुलिस की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही है और भरोसा दिलाया गया है कि—

हर लापता बच्चा ढूंढा जाएगा और मानवता के सौदागरों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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