झारखंड हाईकोर्ट से राज्य पुलिस को बड़ा झटका, ED अधिकारियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई पर लगायी रोक

Anand Kumar
4 Min Read

Ranchi :भ्रष्टाचार के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय) और झारखंड पुलिस के बीच उत्पन्न टकराव अब न्यायपालिका की दहलीज तक पहुंच चुका है। इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस को बड़ा झटका देते हुए ED अधिकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक या पीड़क कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।

हाई कोर्ट के इस आदेश से जहां केंद्रीय जांच एजेंसी को बड़ी राहत मिली है, वहीं राज्य पुलिस की जांच प्रक्रिया फिलहाल ठहर गई है।


FIR से हाई कोर्ट तक: कैसे बढ़ा मामला

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (PHED) के कर्मी संतोष कुमार ने ED अधिकारियों के खिलाफ एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। संतोष कुमार पर शहरी जलापूर्ति योजना में करीब 20 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप है, जिसकी जांच ED मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कर रही है।

प्राथमिकी दर्ज होने के अगले ही दिन, गुरुवार को रांची पुलिस की एक टीम जांच के लिए एयरपोर्ट रोड स्थित ED कार्यालय पहुंच गई। इसी कार्रवाई को लेकर ED ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


ED दफ्तर में रांची पुलिस की छापेमारी से टकराव तेज, CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंची एजेंसी

हाई कोर्ट में सुनवाई, गृह मंत्रालय भी पक्षकार

ED अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने के मामले में जस्टिस एस.के. द्विवेदी की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया और ED कार्यालय को पैरामिलिट्री सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता संतोष कुमार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक पुलिस जांच पर रोक रहेगी। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।


ED का पक्ष: “बंगाल मॉडल दोहराया जा रहा”

ED की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि झारखंड में पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति दोहराई जा रही है, जहां राज्य मशीनरी के जरिए केंद्रीय एजेंसियों की जांच में हस्तक्षेप किया गया। ED ने कहा कि—

  • अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई
  • जांच के नाम पर राज्य पुलिस सीधे ED कार्यालय पहुंच गई
  • इससे संवेदनशील दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है

ED ने पूरे मामले की CBI जांच, प्राथमिकी को निरस्त करने और पुलिस कार्रवाई पर पूर्ण रोक की मांग की है।


विनय चौबे के खिलाफ गवाही का मिला इनाम! गजेंद्र सिंह फिर संयुक्त उत्पाद आयुक्त की कुर्सी पर विराजमान

वकीलों ने रखा पक्ष

ED की ओर से अधिवक्ता एके दास और सौरव कुमार ने अदालत में पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बहस की।

ED की याचिका में सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक प्रवर्तन अधिकारी शुभम भारती ने आरोप लगाया है कि राज्य पुलिस भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर सकती है और जांच को प्रभावित किया जा रहा है।


मारपीट के आरोप से बढ़ा टकराव

दोनों एजेंसियों के बीच टकराव की स्थिति तब बनी जब PHED कर्मी संतोष कुमार ने आरोप लगाया कि ED द्वारा पूछताछ के दौरान उसके साथ मारपीट की गई। इसी आरोप के आधार पर मंगलवार को एयरपोर्ट थाना में FIR दर्ज की गई थी, जिसके बाद गुरुवार को रांची पुलिस ED कार्यालय पहुंची।

अब हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद यह मामला संघीय ढांचे, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और राज्य-केंद्र संबंधों के बड़े सवाल से जुड़ गया है।

झारखंड हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका खारिज

Share This Article
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *