Ghatshila ByElection : बाबूलाल सोरेन vs सोमेश सोरेन, भाजपा का खाता खुलेगा या JMM की जीत कायम रहेगी?

Anand Kumar
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उम्मीदवारों से ज्यादा हेमंत सोरेन बनाम चंपाई सोरेन का मुकाबला होगा Ghatshila ByElection में

 Ghatshila ByElection

आनंद कुमार
जैसी कि उम्मीद थी, घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन और दिवंगत विधायक एवं मंत्री रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन के बीच होगा। भाजपा और झामुमो दोनों ने अपने उम्मीदवारों के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

बाबूलाल सोरेन को प्रत्याशी बनाए जाने का अनुमान पहले ही था, इसलिए उन्होंने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के साथ पहले से ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी थी। बाबूलाल 2024 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के उम्मीदवार थे, लेकिन झामुमो प्रत्याशी रामदास सोरेन ने उन्हें 22,000 से अधिक वोटों से हराया था। ठीक एक साल बाद, बाबूलाल सोरेन घाटशिला में एक बार फिर चुनावी समर में हैं।

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जेएमएम की केंद्रीय समिति की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में सोमेश सोरेन को उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया गया। पार्टी का मानना है कि सोमेश अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं। उन्होंने नामांकन के लिए दो दिन पहले ही परचा खरीदा और कहा कि पार्टी के निर्देश पर उन्होंने ऐसा किया। 17 अक्टूबर को वे नामांकन फाइल करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत तीन से चार मंत्री सोमेश सोरेन के साथ रहेंगे। नामांकन से पहले हेमंत सोरेन 12 बजे दाहीगोड़ा सर्कस मैदान में चुनावी सभा को भी संबोधित करेंगे। उनके साथ कल्पना सोरेन, जेएमएम विधायक और गांडेय सीट से, भी मौजूद रहेंगी।

भले ही घाटशिला में उम्मीदवार बाबूलाल और सोमेश होंगे, असली मुकाबला चंपाई सोरेन बनाम हेमंत सोरेन ही माना जा रहा है। सोमेश पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि बाबूलाल दूसरी बार। भाजपा ने बाबूलाल के समर्थन में 40 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है, लेकिन घाटशिला में स्थानीय स्तर पर चंपाई सोरेन का प्रभाव अब भी निर्णायक है।

जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली छह विधानसभा सीटों में घाटशिला भी शामिल है। पिछले तीन चुनावों में जेएमएम लगातार जीत रही है। भाजपा के लिए यहां कुड़मी वोट बैंक और आदिवासी वोट भी चुनौती बने हुए हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कुड़मी वोटों का असर भाजपा के पक्ष में नहीं दिखा।

भाजपा के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव राज्य को ‘‘बिचौलियों, भ्रष्टाचार और सत्ता के दलालों’’ से बचाने की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आदिवासियों और स्थानीय लोगों के लिए ‘अबुआ सरकार’ चलाने का दावा करते हैं, लेकिन उनके नेतृत्व वाली सरकार पर लोग भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

घाटशिला विधानसभा क्षेत्र आदिवासी बहुल और एसटी रिजर्व सीट है। इसमें घाटशिला, धालभूमगढ़, मुसाबनी और गुड़ाबांदा के हिस्से आते हैं। उत्तर में पश्चिम बंगाल और दक्षिण में ओडिशा की सीमा होने से यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। बंद खदानों और फैक्ट्रियों के कारण स्थानीय मजदूरों की संख्या घट गई है। कभी मुसाबनी ग्रुप ऑफ माइंस में 12,000 से अधिक मजदूर थे, अब केवल 1,200 रह गए हैं। धालभूमगढ़ की स्पीलर फैक्ट्री 15 साल से बंद है। मजदूरों से जुड़े मुद्दे अब चुनाव में प्रमुख नहीं हैं।

घाटशिला विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि भाजपा ने यहां केवल 2014 में जीत दर्ज की है। क्या बाबूलाल सोरेन भाजपा का खाता खोल पाएंगे या हेमंत सोरेन की अगुवाई में जेएमएम अपनी जीत बनाए रखेगी, यह 14 नवंबर को वोटों की गिनती के बाद ही स्पष्ट होगा।

घाटशिला उपचुनाव 2025 — मुख्य तथ्य

विषयविवरण
केंद्र क्यों रिक्त हुआझारखंड के शिक्षा मंत्री एवं विधायक रामदास सोरेन (62 वर्ष) का 15 अगस्त 2025 को दिल्ली में निधन हो गया, जिससे घाटशिला (ST) विधानसभा सीट रिक्त हुई।
मतदान तिथि11 नवंबर 2025
मतगणना की तिथि14 नवंबर 2025
अधिसूचना जारी होने की तिथि13 अक्टूबर 2025
नामांकन की अंतिम तिथि21 अक्टूबर 2025
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि24 अक्टूबर 2025
मतदाता संख्यालगभग 2,55,823 मतदाता; प्रारंभिक सूची में ~2,51,367 नाम थे, बाद में ~4,456 नए मतदाता जोड़े गए।
मतदान केंद्र (पोलिंग स्टेशन)कुल 300 पोलिंग स्टेशन; बूथ संख्या बढ़ी, स्थानों की संख्या ~218 पोलिंग भवन बनाए गए।

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और एमबीए (मार्केटिंग) की शिक्षा प्राप्त की है। 1996 में 'प्रभात खबर', रांची से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार करियर की शुरुआत करके 'हिन्दुस्तान' और 'अमर उजाला' जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके आनंद कुमार हिन्दुस्तान, जमशेदपुर के स्थानीय संपादक भी रहे हैं। इसके अलावा The Photon News अखबार सहित Lagatar.in तथा Newswing.com जैसे डिजिटल माध्यमों में संपादक पद का दायित्व संभाल चुके हैं। इसके अलावा आनंद कुमार कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन/जनसंपर्क, प्रबंधन, सरकार/प्रशासन और मीडिया शिक्षण का भी गहन अनुभव रखते हैं। उन्होंने सरयू राय - एक नाम कई आयाम' नामक पुस्तक का संपादन भी किया है।
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